स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा-मनोज सिंह ‘यशस्वी’

नव वर्ष पर

स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
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देख जरा अम्बर मुस्काता ये,
थरथरी लहर एहसास देता जब ये ।

देखना जरा उस कश्मीर को तुम भी,
कैसे मखमली स्वेत चादर ओढ़ी ये ।

समंदर की लहरें शांत मधुर हो गईं,
सरिता संग मधुर गान करती ये ।

महीधर का शीश वरिधर चूमता कभी,
पावं पखारती तरनी देख जरा ये ।

देख जरा लहलहाता उस तिरंगे को
वीर पुत्रों के बलिदानो की पहचान ये ।

स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा इस धरा पे,
जहाँ है ज्ञान विज्ञान प्रेम धर्म सब ये ।

कैलेंडर के पन्नों में बितता तारीख जब,
मन उमंग की ज्वाला से भर जाती ये ।

मनोज सिंह ‘यशस्वी’
जमशेदपुर, झारखंड

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