नूतन वर्ष की स्वर्णिम वेला-वीना आडवानी तन्वी

नववर्ष
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नूतन वर्ष की स्वर्णिम वेला
जैसे मौसम हुआ अलबेला
बित गया जो बुरा सपना समझो
बहुत कुछ था हम सबने झेला।।

देखो नववर्ष से पावन धरती पर
छाया सौंदर्य प्राकृतिक का मेला
घनघोर घटा, सूरज की किरणें
कर रही अनुपम हर एक वेला।।

नभचर में उड़ते ये पंछियों की टोली
जता रही आया फिर एक नया सवेरा
छट गया जैसे अंधकारमय गत वर्ष
मुस्कुराओं सभी यही तो कहे ये बेला।।

समझ रहे, हो भी गये थे हर कोई
गत वर्ष खुद को बहुत अकेला।।
आओ नववर्ष की छटा में फिर चलाओ
खुशियों, अपनत्व ,प्रेम, सौहार्द्र का रेला।।

बहुत कुछ झेले थे हर कोई गत वर्ष
हर ओर था दु:ख, दर्द, डर ही फैला।।
भूल जाओ अब सब कुछ हर कोई
साथ दो हर किसी का ना हो कोई झमेला।।

नूतन वर्ष की मधुर लय संग गूंजें संगीत
जैसे लगे आ गया वही स्वर्णिम भारत नवेला।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
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18 thoughts on “नूतन वर्ष की स्वर्णिम वेला-वीना आडवानी तन्वी”

  1. 👌👌 लाजबाब सृजन हेतु आदरणीया वीना अडवाणी जी को हार्दिक शुभकामनाएँ 💐💐👍

  2. नूतन वर्ष में नव-नूतन
    इक शपथ ले चलें
    “माँ” की सेवा पूजा की
    इक शपथ ले चलें
    भारत सोने की चिड़िया
    फिर से बन जाये
    महक जाए आवाम
    जीवन सुखमय हो जाये
    एका का ही भाव
    सभी के हृदय प्ले
    सेवा में ही जीवन बीते
    गगन तले

    स्वरचित
    डॉ आर के मतङ्ग
    श्री अयोध्या धाम

  3. Bhuuuuuuut bdhai ho dee apko 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

  4. आदरणीय विणाजी बहुत ही बेहतरीन रचना है आपकी नव वर्ष पर , आपको बहुत बधाई व मंगलकामनाये

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