नये साल में-डॉ. प्रतिभा स्मृति

नए साल में

चीर घटा घनघोर अंधेरा
फिर आएगा नया सबेरा
नया सबेरा से नव कर कुछ
मत करना पर नया बखेरा।

सूर्यास्त से सिकुड़ी पंखुड़ी
सूर्योदय संग खिल जाएगा
रिश्ते में जो पड़ी गाँठ है
जरा प्रयास कर,खुल जाएगा।

जो बीत गई वो बात पुरानी
लिख लो फिर से नयी कहानी
नए साल में प्रण लो ऐसा
रहे नियंत्रित जिससे वाणी ।

करो किसी का मत अपमान
सुवाणी से मिले सम्मान
कटु-मधुर संबंध का नींव ये
यही घटाए – बढ़ाए मान ।

डॉ. प्रतिभा स्मृति
दरभंगा (बिहार)

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