नये वर्ष का हर्ष कहाँ है- सुधा सेन ‘सरिता ‘

*नये वर्ष का हर्ष कहाँ है*

कितनों की मुस्कान छुडाई।
बीता वर्ष रहा दुखदाई।
हृदय वेदना ग्रस्त जहाँ है।
खुशियों से मन मस्त कहाँ है।

कोरोना की मार बड़ी है।
चूल्हा-चक्की बंद पड़ी है।
दुख का हाहाकार यहाँ है।
सपनों का व्यापार कहाँ है।

बिन खाये ही बूढ़े सोते।
बिलख-बिलख कर बच्चे रोते।
उद्यम सारे बंद यहाँ हैं।
अब अनुरागित छंद कहाँ हैं?

कोरोना के टीके आये।
सबने दो-दो बार लगाये।
फिर भी चिंता मे हि जहाँ है।
कौन भला आश्वस्त यहाँ है?

कोरोना ने ऐसा लूटा।
बसा बसाया घर है टूटा।
उजड़ा-सा संसार यहाँ है।
जन-मन सब लाचार यहाँ है।

सांत्वना दें किसी को कैसे?
बहते आँसू पोछें कैसे?
नवल वर्ष-उत्कर्ष कहाँ है?
नये वर्ष का हर्ष कहाँ है?

सुधा सेन ‘सरिता ‘
रीवा (मध्य प्रदेश )
7509250816

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