रमाकान्त सोनी की तीन खास रचनाये

सच का पता आसान नहीं है
विधा कविता
1

तूफां से भिड़ना पड़ता है आंधी से लड़ना पड़ता है
उर हौसला दुर्गम पथ पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता है

नदी नाले कंटक राहों का पथिक कहो ज्ञान नहीं है
सत्य की राह चलना सच का पथ आसान नहीं है

मुश्किलें बाधाओं से हमें हिम्मत से टकराना होगा
कभी भंवर में अटकी नैया मांझी पार लगाना होगा

झूठ कपट स्वार्थ का भी शायद ये अनुमान नहीं है
स्वार्थ भरी दुनिया में सच का पथ आसान नहीं है

जो हिमालय बने बैठे जाने किस मद का अभिमान
शील सादगी विनय भूल औरों का करते अपमान

समय सदा ना रहे एकसा कहो शायद भान नहीं है
संघर्षों से लड़ते रहना सच का पथ आसान नहीं है

2

रिश्तो की डगर पर जिम्मेदारी खूब निभाता हूं
जीवन के उतार-चढ़ाव में संभल कर जाता हूं

घर परिवार कुटुंब समाज सदा स्नेह लुटाता हूं
अपनापन अनमोल है अपनों से प्यार पाता हूं

मात पिता की सेवा करना समझे सब जिम्मेदारी
तरुणाई है चार दिन की फिर आगे अपनी बारी

सीमा पर सजग प्रहरी भी सीना तान निभाता है
आन तिरंगा की खातिर अपना लहू बहाता है

एक पिता संतान को शिक्षा अच्छी दिलवाता है
सुशिक्षा संस्कार दे खुद जिम्मेदारी निभाता है

मां भी अपनी जिम्मेदारी स्नेह दुलार दे करती है
प्रथम गुरु माता जो औलाद में संस्कार भरती है

भाई अपनी जिम्मेदारी बहना को बतलाता है
संकट में रक्षा करूंगा वचन दे राखी बंधवाता है

गृहस्थी का रथ भी जो दो पहियों पर चलता है
सुखी वह घर होता जहां प्रेम भाव ही पलता है

सात फेरों में वचन देकर जो जिम्मेदारी मानता है
वह घर स्वर्ग से सुंदर है सारा जमाना जानता है

नारी भी जिम्मेदारी अपनी सुंदरता से निभाती है
सभ्यता संस्कार संजोकर राष्ट्र संस्कृति दर्शाती है

समाज का हर बाशिंदा सब जिम्मेदारी जानो
अपना देश अपना राष्ट्र जीवन मूल्य पहचानो

3

गौमाता को जीने दो
दूध की नदियां बहने दो
राष्ट्र उत्थान होने को है
इनका संरक्षण होने दो

जिसे घर में गौ पाली जाती
वो धाम अभय हो जाता है
साक्षात रूप में विष्णु को
गोलोकधाम को पाता है

इनके निवास से गोकुल का
सदा सुख मानव पाता
दुर्गा माता के नौ रूपों में
दो रूप गाय का आता

ये मनोकामना पूरी करती
और कामधेनु कहलाती है
जिस जंगल में चरने जाए
वो गोचर भूमि हो जाती है

गौ सेवा के कारण श्री कृष्ण
गोविंद से गोपाल बन जाता
लोहार्गल में जल गोमुख से
पुष्कर गौ घाट से जल आता

जाने कितनी ही व्याधि में
गोमूत्र पिलाया जाता है
विषधर के काट निशाने पर
गोबर लेप लगाया जाता है

देवी की जोत जलाने में
गोबर की थेप बनाते हैं
घर में सुख समृद्धि आती
सारे संताप मिट जाते हैं

गायों की सेवा करने से
ग्रह नक्षत्र अनुकूल रहे
भाग्यशाली नर हो जाये
पाप नष्ट सारे समूल रहे

रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान

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