नववर्ष आयोजन-प्रज्ञा आम्बेरकर

नववर्ष आयोजन

नव वर्ष आया है,
नव खुशियां लाया है,
इन खुशियों को जी लो तुम,
इन खुशियों को सी लो तुम,
नव वर्ष आया है,
नव खुशियां लाया है।

नई उमंग है,
नई तरंग है,
इन तरंगों से खुद को रंग लो तुम,
इन तरंगों के संग हो लो तुम,
नव वर्ष आया है,
नव खुशियां लाया है।

नया जोश आया है,
नया होश लाया है,
इस जोश में नई सोच रखो तुम,
इस जोश में नया पथ चुनो तुम,
नव वर्ष आया है,
नव खुशियां लाया है।

प्रज्ञा आम्बेरकर,
स्वरचित मौलिक कविता।
मुंबई, महाराष्ट्र, भारत।

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