नव वर्ष-प्रीति धीरज जैन “धीरप्रीत”

नव वर्ष

उम्मीद करते हैं हम, उत्साह से भरा हो यह नव वर्ष।
छाएं जन जन में हर्ष, हो नववर्ष में नव जगत का उत्कर्ष।
न कोई सहमा, ना डरा हो, गत वर्षों का न कोई घाव हरा हो।
नई भोर, खुशियों की किरणें चहुंओर, ना हो अब कोई संघर्ष।

गत समय में जो जो बीता, अंतर्मन था हर मनुज का रीता।
खुशियां ही खुशियां हो सबके जीवन में, बहे प्रेम की सरिता।
बुने हैं जो स्वप्न आंखों से, हर मन के स्वप्न संपूर्ण हो।
नववर्ष की नवचेतना खुशियों के दीप जलाएं, हो मां भारती प्रकाशिता।

अंधियारे तम से नई उजली किरणें कर रही उजियारा।
नव वर्ष में गीत खुशियों के गाएगा ज़रूर यह जग सारा।
दूर छटेंगे गम के बादल, महकेगी पुरवाई जैसे हो संदल।
नव कल्पनाओं का उच्छृंखल सागर, हो नई प्रेरणाओं का किनारा।

कटु यादें मन से बिसराएं, खुशगंवार यादें मन में सजाएं।
उमंग भरी लहरों के निमंत्रण में बहता चल, क्युं कदम डगमगाएं।
नए वर्ष में नए पथ पर बढ़ा कदम, ना हो सुस्त तेरा चितवन।
जुगनू बन कर तम को मिटाएं, आओ खुशनुमा नववर्ष मनाएं।

बीते समय की धारा में, धूप, छांव, दु:ख की बदली थी जो साथ साथ।
विदा कर ‘2021’ को, आशा का दीप जला मन में करे “नववर्ष” का स्वागत।
नए पथ पर हो अग्रसर, राही चलता चल चाहे हो डगमगाती डगर।
चमचमाती किरणों सी, नए स्वप्न की, नवआशाओं की मिलेगी नववर्ष में सौगात।

प्रीति धीरज जैन “धीरप्रीत” इंदौर मध्यप्रदेश ✍🏻✍🏻

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