प्यार का हिंदुस्तान हो- राम रतन श्रीवास “राधे राधे”

“नव प्रेरणा” कविता
“प्यार से प्यारभरा ,प्यार का हिंदुस्तान हो”
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प्रतिदिन प्रतिपल ,प्रदिप्त प्रतिभावों का हो ।
ना प्रतिद्वंद्वी , ना प्रतिपक्षता किसी का हो।।
प्रेम पथ प्रेम पुजारी, नव प्रेरणा से प्रेरित हो।
प्रकृति प्रेम से प्रेममय, नव सृजन पूरित हो।।
प्यार से प्यारभरा, प्यार का हिंदुस्तान हो ……

पढ़ें पढ़कर बढ़ें, शिक्षा से न कोई वंचित हो।
लोक परलोक पर्यंत, परोपकारी पर्याप्त हो।।
पीड़ा न पीड़ादायक, पीड़ामुक्त संसार हो।।पापबुद्धि,पापभोग,पापमति से पापरहित हो।
प्यार से प्यारभरा ,प्यार का हिंदुस्तान हो…..

पापचार,ब्यभीचार,व्यसन,मुक्त हिंदुस्तान हो।
प्रकाश से प्रकाशित, प्रकाशमान हिंदुस्तान हो।
प्रगति से प्रगतिवाद ,प्रगतिशील हिंदुस्तान हो।।
प्रार्थना परमेश्वर से,*राम* का ऊर्जा हिंदुस्तान हो।
प्यार से प्यारभरा ,प्यार का हिंदुस्तान हो ……

प्रतिनिधित्व शांति का,शंखनाद हिंदुस्तान हो।
प्रेरणा से प्रेरणादायी, प्रेरणास्रोत हिंदुस्तान हो।।
प्रभाकर से प्रभामंडल , प्रभा का प्रसार हो।
ऐसी “नव प्रेरणा” ,नव सृजन का संचार हो।।
प्यार से प्यारभरा ,प्यार का हिंदुस्तान हो ……
परिचय दें भारत की शान, विश्व में अग्रणी हो….
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– राम रतन श्रीवास “राधे राधे”

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