नव वर्ष कविता-रमा बहेड

नव वर्ष प्रतियोगिता हेतु

विधा_ कविता
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इस वर्ष करोना ने जीवन में मचाई हलचल,
नव वर्ष लाए सबके जीवन में सुनहरा पल।
इस सोच में ना तू समय बिता,
तूने क्या खोया क्या पाया है,
मन की आंखों से देख जरा,
ताम्र वर्ण लेकर गर्भ विभा पर,
नूतन वर्ष क्या लेकर आया है।
सुखद रात सुप्रभात नई सौगात लेकर आया है,
नई उम्मीदें नई खुशियां नव विश्वास लेकर आया है।
रंग खुशी का रंग हंँसी का,
उम्मीदों और उमंगों का नव रंग लेकर आया है।
कल्पना के पंख लगाकर,
आशाओं के दीप जलाने आया है।
जात पात का भेद भुलाने,
राष्ट्रहित के भाव जगाने आया है।
सेवा भाव समर्पण लेकर,
प्रेम प्यार का दर्पण लेकर,
विसंगतियों पर अंकुश लगाने आया है।
नया दिन है नया साल हैं,
चलो कुछ नया करते हैं,
सत्य का मंडन करते हैं,
दंभ का खंडन करते हैं ,
वेदो के बल से ,
युक्ति के प्रबल से,
प्रगति के पथ पर चलते हैं,
चलो कुछ अच्छा करते हैं ।
गिरे हुओं को उठाते हैं, भटको को राह दिखाते हैं,
सब कहते हैं हम करके दिखाते हैं,
जीत के लिए फिर से मेहनत करते हैं,
गत वर्ष की असफलता को सफलता में बदलते हैं,
चलो कुछ नया करते हैं।
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रमा बहेड हैदराबाद तेलंगाना राज्य

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