रुनझुन को नीरजा ठाकुर का पत्र

प्रिय रुनझुन
खुश रहो
पिछले पत्र में तुमने हिंदी भाषा के व्यंजन के विषय में पूछा था ,वह बता रही हूंँ।
हिंदी भाषा बहुत समृध्द भाषा है। में व्यंजन मूलत: ४ प्रकार के होते हैं
१- स्पर्श व्यंजन
२- अंत्स्य व्यंजन
३- उष्म व्यंजन
४-संयुक्त व्यंजन आज हम स्पर्श व्यंजन के विषय में बात करते हैं। स्पर्श व्यंजन ये संख्या में २५ होते हैं।

१- क वर्ग- इसमें आते हैं
क ख ग घ ड़- ये कंठ से बोले जाते हैं,
इस लिए इन्हें कंठ्य कहा जाता है।
२- च वर्ग- इसमें हैं च छ ज झ इय् ये तालू के स्पर्श से बोले जाते हैं इस लिये इन्हें तालव्य कहा जाता है।
३-ट वर्ग- इसमें ट ठ ड ढ ण ये मूर्धन्य वर्ण कहलाते है।
४-त वर्ग- इसमें हैं त थ द ध न ये दांतों के स्पर्श से बोले जाते हैं। इस लिए यह दंत्य वर्ण कहलाते हैं।
५- प वर्ग- इसमें हैं प फ ब भ म ये ओंठ के स्पर्श से बोले जाते हैं इसलिए इन्हें ओंष्ठ्य वर्ण कहे जाते हैं।
ये स्पर्श व्यंजन हैं।

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२अंतस्थ व्यंजन-इसमें है़ य र ल व
३ – उष्म व्यंजन- इसमें है़ श ष स ह
४-संयुक्त व्यंजन- श्र क्ष त्र ज्ञ
संयुक्त व्यंजन आधे होते हैं जो दूसरे वर्ण से जुड़ते है़।
जैसे-
श्र- र
आधा श+ आधा र
क्ष-आधा क+आधा ष
त्र- आधा त+आधा र
ज्ञ- आधा ज+आधा य
ज+आधा य अच्छा रुनझुन। आज के लिए बस इतना ही बाकी बाद में तुम्हारी मम्मी नीरजा ठाकुर नीर पलावा डोम्बिवली महाराष्ट्र

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