विचार और भाव का संगम स्थल है-साहित्य

(579)पांचदिनी दीपोत्सव ‘गोवर्धनपूजन’-काव्य
*विचार और भाव का संगम स्थल है-साहित्य*

मां कात्यायनी ग्याराहजारी-राष्ट्रीय-काव्य संस्थान
‘विमल भवन’, विकास नगर, लखनऊ-22
चलभाष : 9454831866/7651996416
संरक्षक:श्रद्धेय श्रीश्री गंगेश बाबा (मुजफ्फरपुर)
संस्थापक/संयोजक/संचालक:
-सम्पत्ति कुमार मिश्र”भ्रमर बैसवारी” (छंदकार)
मीडिया प्रभारी-श्री पीयूष मिश्र ”भइयाजी”
शुक्रवार, 05 नवम्बर, 2021
अध्यक्षता-डा. सत्यदेव द्विवेदी “पथिक”
मु.अ.-डा.सुरेशप्रकाश शुक्ल ‘साहित्य भूषण’
वि.अ.- श्री महेन्द्रभीष्म(वरिष्ठ साहित्यकार)
डा. शोभा वाजपेयी (वरिष्ठ कवयित्री)
वाणी वंदना-श्री पीयूष मिश्र “भइयाजी”
श्रीमती शोभा-आशुतोष अवस्थी (हरदोई)
श्री राजीवकुमार शुक्ल शिक्षक- कवि(वाराणसी)
प्रो.बी.जी.द्विवेदी-डा.प्रतिभा पाण्डेय(कानपुर)
श्री सच्चिदानन्द तिवारी “शलभ” (गीतकार)
श्री कैलाश प्रकाश त्रिपाठी “पुंज” (वरिष्ठ कवि)
प्रो.एस.पी.दीक्षित(पूर्व पत्रकारिता प्र. लविवि)
श्री प्रदुम्न तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार )
श्री अमरेन्द्र तिवारी(दैनिक जागरण,मुजफ्फरपुर)
‘शेर’ मिथिलेशसिंह चौहान(पार्षद-लोहियानगर)
श्री राजेश मोहन मिश्र (साहित्य प्रेमी)
श्री आनन्दमोहन द्विवेदी (राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षक, उन्नाव)-प्रो.वी.जी.गोस्वामी(पूर्व ला)
श्री रामेश्वर पाण्डेय (पूर्व संपादकीय प्र.दै.जा.)
श्री संतोष कुमार त्रिपाठी (साहित्य प्रेमी)
श्री अनुराग मिश्र(संपादक, हनुमत कृपा मीडिया)
इंजी.विवेकानन्द प्रसाद (दै.जागरण, मुज.)
श्री अफजाल अहमद अंसारी (वरिष्ठ पत्रकार)
श्री रमेश चन्द्र मौर्य-श्री त्रिलोकी सिंह(साहित्य)
डा.अलकामिॆश्रा(डीएसएनपीजी कालेज,उन्नाव)
श्री प्रेमशंकर पाण्डेय “मानु भइया” (प्रयागराज)
श्रीअमित टण्डन”कल्लू भइया”(साहित्य प्रेमी)
श्री शिवकैलाश नारायण तिवारी (साहित्य प्रेमी)
श्री विनोद शुक्ल-श्री मनोजझा (पटना-बिहार)
श्री राजेन्द्र शुक्ल “राज” (वरिष्ठ कवि)
डा.जानकीशरण शुक्ल (वरिष्ठ साहित्यकार)
डा. संगमलाल त्रिपाठी “भंवर”(प्रतापगढ़)
श्रीमती आशा अवस्थी (जबलपुर, म.प्र.)
श्री एम. सी.द्विवेदी (पूर्व डीजीपी, उ.प्र.)
+सम्पत्ति कुमार मिश्र “भ्रमर बैसवारी”छंदकार–
इंद्र दर्प तोड़ने को, द्वापर में कृष्ण जी ने,
उंगली में गोवर्धन-पर्वत उठाया था।
इंद्र का ही होता रहा, पूजन यहां सदा से,
उसे छोड़, गाय बछड़े को, पुजवाया था ।
क्रोधित हो इंद्र ने की, सात दिनों अति वृष्टि,
पर्वत के नीचे, पूरा नगर, बसाया था।
छप्पन-भोग बनते, आज “भ्रमर”-घरों में,
गोबर-गणेश, द्वारे-द्वारे सजवाया था।।
+डा.सुरेश प्रकाश शुक्ल (साहित्य भूषण)-
दीपावली उत्सव तब, अन्नकूट तब दूज l
कार्तिक शुक्ल प्रतिप्रदा,गोवर्धन को पूज ll
पड़वा या प्रतिप्रदा भी,कहलाता यह पर्व l
गोबर-गोवर्धन बना , होता हमको गर्व ll
नहलाएं पशु पालतू , करें सजावट योग l
पूजन कर अर्पित करें,पकवानों का भोग ll
इस दिन की है मान्यता , त्रेता में देवेश l
गोकुल से होकर कुपित , वर्षाए थे क्लेश ll
तब भगवन श्रीकृष्ण ने, गिरि में ऊँगली टेक l
किया सुरक्षित सभी को,भाव भर दिए नेक ll
गोवर्धन पूजा-प्रथा, तब से व्यापी लोक l
हे कृष्णा रक्षा करो , कभी न आये शोक ll
+डॉ सत्यदेव द्विवेदी “पथिक”-कभी शस्त्र है तो कभी शास्त्र भी है, दिया ईश ने हस्त को धन्य मानो। दया और रक्षार्थ में काम आये, प्रयोगी बनो जो जहाँ ठीक ठानो।। यही पूजते पाँव श्रद्धा सिखाते, इन्हीं से बजा है सदा ही पियानो। सभी शस्त्र को धारते हाथ ही हैं, जुड़े जो हथेली नमस्कार जानो ।।
+कर्नल प्रवीण त्रिपाठी(नोएडा)-द्वापर में कान्हा थे जन्में, गोकुल ब्रज के थे प्यारे।इंद्र के’ बदले गोवर्धन की, पूजा हेतु मनाते हैं। कुपित इंद्र की आज्ञा पाकर, मेघों नेअति वृष्टि करी, गिरि उंगली पर धारण करके, वह राहत पहुंचाते हैं।
+श्री मयंक किशोर शुक्ल “मयंक”-मन को सुमन बनाने वाले। भू से गगन दिखाने वाले।। समय लिखेगा इतिहास “मयंक”,तम घर दीप जलाने वाले।।
+श्रीमती गीता पांडेय “अपराजिता” (रायबरेली)-
लक्ष्मी पूजन कर लिया, नमन करो सब आज।
गोवर्धन भी पूज लो साजो सारे साज।।
संग संग इसके सदा, पूजन गाय विधान ।
कृष्णा ने इसे उठा , बचा लिया बृज लाज।।
वैसे ही कान्हा सदा, करना जग कल्याण।
विपदा सारी दूर हो मिट जाए सब त्राण ।।
जीवन सबका हो सुखी, विनय करूंँ कर जोड़।
गोवर्धन करती नमन, आय बसों प्रभु प्राण।।
+श्री नंदलाल मणि त्रिपाठी (पीताम्बर, गोरखपुर)-
तूने तो गिरवर गिरधारी गिर अंगुलियों पे उठाया है इंद्र अहंकार को ब्रह्म स्वरूप दिखाया है।।
इंद्र कोप से वर्षा प्रकोप हाहाकार ग्वाल बाल सखातेरो नाम पुकारे गिरधारी जग नाम तारन हार जगत ने पाया है।।
कर्म धर्म का याथार्त प्रकृति पर्यावरण झरना नदियां झील पहाड़ सब तेरे ही रूप प्रकृति ब्रह्मांड महिमा जन को बतलाया है।।
गोवर्धन पूजा तेरी ही महिमा धन धान्य कर्षति इति कृष्णा योगी योगेश्वर तेरा गुण गान गोवर्धन वंन्दन रहस्य की माया है।।
+श्री रमेश चन्द्र मौर्य-दीपोत्सव ज्ञान का मान का सम्मान का, यश का वैभव का दया धर्म अभिमान का। करें प्रज्वलित दीपकऐसा दूर अंधेरा होजाये, बस्ती बस्ती जंगल जंगल नया सवेरा हो जाये।
+सुकाव्य-सर्वश्री-गोबर गणेश, मनमोहन वाराकोटी, नीतू मिश्रा, शीला वर्मा “मीरा”..
+संयोजक सम्पत्ति कुमार मिश्र “भ्रमर बैसवारी” ने सभी मनीषियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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