संवाद-विनय कुमार सिन्हा

———संवाद——
संवाद अर्थात आपस में बातचीत।यह हमेशा होते रहना चाहिए।
संवाद भक्त का भगवान या अराध्य के साथ।
संवाद शिष्य का गुरु के साथ।
संवाद पुरुष का प्रकृति के साथ।
संवाद पति का पत्नी के साथ।
संवाद पुत्र का माता पिता के साथ।
संवाद भाई बहनों के साथ।
संवाद नियोक्ता का कर्मचारियों के साथ।
संवाद मालिक का अनुचरों के साथ।
संवाद राजा का प्रजा के साथ।
संवाद राष्ट्र प्रमुख का मंत्रियों के साथ।
संवाद जन प्रतिनिधियों का जनता के साथ।
संवाद पड़ोसियों के साथ।
संवाद मित्रों के साथ।
संवाद सगे संबंधियों के साथ।
संवाद वैद्य का मरिजों के साथ।
संवाद कलाकारों का कला पारखियों के साथ।
संवाद जीवों जन्तुओं के साथ।
संवाद पेड़ ,पौधों , पुष्पों के साथ।
संवाद अपनी अंतरात्मा के साथ।
संवाद मिटा देता है गलतफहमियां।
संवाद बढ़ाता है सामंजस्य।
संवाद बढ़ाता है अपनापन, प्रेम।
संवाद दिखलाता है नई दिशाएं।
संवाद मिटाता है उलझने।
संवाद खोलता है नये नये द्वार।
संवाद मिलाता है सर्वौच्च प्रभु से।
संवाद करते रहिए हर पल।
संवाद क्यों न हो मौन या सश्वर।

—- विनय कुमार सिन्हा, गया
दिनांक-10/04/2021

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