बस साल है बदला- संध्या जाधव

साल है बदलता , न बदलतें है हालात
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कोई असहाय भटक रहा है राहों पर
कोई भूख से बिलबिला रहा है सड़को पर
कोई आस लगाए बैठा है अपनों पर
हर कोई उम्मीद जताएं बैठा है देश पर
इस साल तो निराशा के बादल हटेगी
हर जगह खुशियों की बारीश बरसेगी
*बस साल है बदलता, न बदलते है* *हालात*

बिताए पल भयानक थे
लोग बेबस लाचार थे
जूझ रहा थे हालातों से
संघर्ष कर रहा थे मौत से
कोई किस्मत से ज़िंदा रह गया
कोई ज़िंदा रह कर भी पल-पल मरता रहा
कितनों का साथ छुट गया
गमों का साल बीत गया
*बस साल है बदलता* *न बदलते है हालात**

विकास के पथ पर बढ़ रहा इंसान
अमीर से अमीर बन रहा इंसान
गरीब का गरीब रह गया इंसान
चारों ओर हाहाकार मची है
कसौटी पर ज़िन्दगी खड़ी है
उम्मीद की रोशनी जलाए बैठे है
मौक़े की तलाश में खड़े है
*बस साल है बदलता न बदलते है हालात*

नया साल नई रोशनी लाएगा
हौसलें की उड़ान भर जाएगा
सबकी तकदीर बदलेगा
असंभव भी संभव हो जाएगा
नए साल में इतिहास रच जाएगा
नव वर्ष का स्वागत उत्साह उमंग से करेंगे
विश्व में भारत का नाम चमकाएंगे

*इस बार साल भी बदलेगा*
*और बदलेंगे हालात भी*

*नए साल में सपना हो अपना*
*सबका साथ सबका विकास संकल्प हो अपना*

*संध्या जाधव, हुबली कर्नाटक* ✍🏻✍🏻

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