नया साल आया-संजय वर्मा “दृष्टि “

नया साल आया

नया साल के सूरज से
धरती पर पड़ी पहली किरण
ओंस की बूंदों के आईने मे
अपना आकार देख कह रही-
ओंस बहन तुम बड़ी भाग्यवान हो
जो मुझसे पहले धरती पर आजाती हो
तुम्हे नर्म घास के बिछोने
पत्तों के झूले मिल जाते

मै हूँ की प्रकृति के जीवों को
जगाने का प्रयत्न करती हूँ
किन्तु हम दोनों को भी
अब भय सताने लगा ?
फितरती इंसानों का
जो पर्यावरण बिगाड़ने मे लगे है
और हमें भी बेटियों की तरह
गर्भ मे मारने लगे
नया साल आया
अब हम नये साल के
आगमन पर हम मिलकर
सूरज से गुहार करेंगी
हमें बचालो |

संजय वर्मा “दृष्टि ”
१२५ ,शहीद भगत सिंग मार्ग
मनावर (धार )मप्र

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