कविता आंचल

आंचल कविता/शायरी ऐ आंचल तेरी छाया में, पहले पहल जिया जीवन में इकलौती छाया, तुमने हमें दिया यहां विधाता भेजा हमको, दुनिया की दर पर छुप छुप जाता आंचल तुझमें, नहीं लगे तब डर लगता जैसे तूं ही घर,जब मैं जग में आया रही सुरक्षित तुमसे तो, मेरी अपनी काया मां के दुःख के आंसू … Read more

पन्द्रह दिन दीवाली लखन कछवाहा

Lakhan

ताजी रचना पन्द्रह दिन दीवाली दीवाली के पर्व की,कहां तक करूं तारीफ । एक खुशी दीपोत्सव, दूजी फसल खरीफ ।। दूजी फसल खरीफ,कृषक में खुशी भारी । हंस-हंस काटें धान, रबी की करते तैयारी ।। रबी फसल फाल्गुन पके, पर्व होला होली । मेला-मढ़ई अहीर नृत्य,पन्द्रह दिन दीवाली ।। ****०**** कवि–लखन कछवाहा ‘स्नेही’ 25-10-2022

अरुण दिव्यांश की रचना बाल दीपावली

बालगीत शीर्षकः दीपावली आओ हम सब दीप जलाएँ , भारत माँ को दीप सजाएँ । जगमग जगमग दीप जला , ईर्ष्या द्वेष हम दूर भगाएँ ।। बिना चाँद के चाँदनी छिटके , मधुर मधुर रौशनी ये टिमके । अंतर्मन के ये दीप जगा लो , शक्ति बनो नीबोरी नीम के ।। दीप जला हम दीप … Read more

लक्ष्मी का आगमन

लक्ष्मी का आगमन शीर्षकः छोटी दिवाली हरि से बोलीं लक्ष्मी माता , सुनिए विनती हे श्रीनाथ । आ रहा है अब दिवस मेरा , भक्तगण कर रहे मेरी गाथ ।। जा रही हूँ अब मैं धरा पर , भक्तों की देखने हेतु भाव । सफाई सुथरे तो खूब होते , आपसी प्रेम होता अभाव ।। … Read more

गीत श्री राम वनवास

प्रभु, श्री राम वनवास ( सुआ गीत ) :::::::::::::::::::: सूनी लागे अवध राजधानी, सुआ हो । सूनी लगे रानी वास, न रे सुआ हो -सूनी लगे रानी वास ।। सूनी नगरिया,नगर के वासी, सुआ हो । राम गए वनवास, न रे सुआ हो-राम गए वनवास ।। —- बसे ननिहाल में भरत शत्रुघ्न, सुआ हो । … Read more

डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश-भजन कृपा करो माँ

एक भजन: कृपा करो, कृपा करो, कृपा करो माँ. कृपा करो, कृपा करो, कृपा करो माँ। मेरे माथे निज प्रीति हाथ धरो माँ।। सीधे-साधे भोलेनाथ ध्यान हैं लगाते, राम के चरण निज शीश हैं झुकाते, आपसे ही अपनी सुनाएंगे हे माता , और किसी को न आसपास देख पाता। विनती है तन मन पीर हरो … Read more

रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर विशेष

परम आदरणीय कवि रामधारी सिंह ‘ दिनकर ‘ जी को उनकी जयन्ती के अवसर पर सहृदय सादर कोटिशः नमन है तथा उनकी अतीव कृपा हम सब पर बरसती रहे यही हमारी उनसे कामना है । कलियुग में रामरूप धारण कर , इस भारतीय जब धरा पर आए । हर्षित पुलकित तब यह धरा थी , … Read more

अरुण दिव्यांश की पांच रचनाएं पढिए

१ निगाहें निगाहें हों निज कदमों पर , कदम डगमगा नहीं सकते । बिन कदमों पे निगाहें डाले , घर भी जगमगा नहीं सकते ।। निगाहें होंगी जब कदमों पे , शीश स्वयं में ही नत होगा । जागेगा मृदुल भाव मन में , निष्ठा प्यार का भी मत होगा ।। शीश स्वयं में तो … Read more