लघुकथा- बाल बाल बच गये


दस वर्ष के बाद चालीस वर्षीय शादीशुदा युवक प्रमोद अपने प्रिय शहर दिलदार नगर आया था।आते हीं उसनेदेखा कि शहर में ओवरव्रिज एवं सड़कों का जाल विछ गया है।शहर में उँचें-उँचें इमारतें बन गयी है। शहर की तरक्की देखकर प्रमोद खुश हुआ।
दिलदार नगर में आने के बाद प्रमोद ने सोचा कि आज अपने प्रिय गायक मित्र रविन्द्र से मिला जाये। उसका हाल-चाल जाना जाये और उससे मोहम्मद रफी का कोई गीत सुना जाय। अकेला जी की रचनाओं को यहाँ पढिये
प्रमोद ने रविन्द्र के घर जाकर उससे उसका हाल-चाल पूछा तो उसने बताया कि हमें पाँच साल पहले संगीत शिक्षक की नौकरी लगी है।
प्रमोद ने रविन्द्र से पूछा कि “तुम्हारी पत्नी घर में नहीं दिखाई दे रही है,क्या वह अपने मायके गयी हैं।”
रविन्द्र ने प्रमोद के कंधे पर हाथ रखते हुये कहा “हम तुम्हें क्या बतायें प्रमोद भाई,हम जब शादी किये तब हम ठगा गये थे। हमें लड़की ठीक नहीं मिली। वह दो साल पहले हमें छोड़कर चली गयी तबसे हम अभी तक अकेलापन का जीवन जी रहे हैं।”
प्रमोद ने रविन्द्र के कंधे पर हाथ रखते हुये कहा “यह तो आपके साथ अच्छा नहीं हो रहा है मेरे भाई।अच्छा रविन्द्र भाई आप पहले
यह तो बताईये कि बिन पत्नी के कैसे जी पाइयेगा”।रविन्द्र ने प्रमोद को समझाते हुये कहा “इस दुनियाँ में बिन पत्नी के करोड़ों लोग है,जो अपना जीवन जीवन सुखी व आनन्दपुर्वक जी रहे हैं”। अच्छा प्रमोद भाई आपको तो मालुम होना चाहिये कि “जिन पत्नियों के पति उस शहर से बाहर नौकरी करते हैं और महीनों घर नहीं आते हैं क्या वे काल बॉय या बौरो पति का इस्तेमाल नहीं करती हैं।वैसी हीं महिलाओं के लिये हम जैसे मर्द समय पर काम आते हैं “।
“प्रमोद भाई इस दुनियाँ में क्या नहीं उपलब्ध है। तुम्हें यदि किसी लड़की या कालगर्ल की जरुरत हो तो हमें कहो हम तुम्हें पाँच से दस मिनट के अन्दर उपलब्ध करवा देंगे”।प्रमोद ने चौकते हुये कहा “क्या इस शहर में भी काल गर्ल या काल बॉय का चलन शुरु हो गया है”।
प्रमोद ने सच्चाई जानने के लिये रविन्द्र को कहा “क्या सचमुच में पाँच से दस मिनट के अन्दर काल गर्ल आ जाती है।फोन करके देखो तो ।जरा हम भी देखते हैं कि सच्चाई क्या है “। तभी प्रमोद ने देखा कि रविन्द्र के काल करते हीं हनी नाम की काल गर्ल अपनी ओढनी से अपना मुँह ढँककर आयी और रविन्द्र से बोली”कहिये सर मुझसे क्या काम है”।
रविन्द्र ने हनी के कंधे पर हाथ रखते हुये कहा “देखो हनी यह मेरा प्रिय मित्र प्रमोद है।तुम्हारा काम है आज मेरे मित्र को खुश कर देना और इसकी थकावट दूर कर देना”।हनी ने कहा कि “आप इनका नम्बर हमें दे दीजिये।हम आज शाम को कहीं बुला लेंगे”। यह कह कहकर साईकिल से वह वापस लौट गई ।
रविन्द्र के घर से वापस अपने होटल लौटने के बाद प्रमोद मन हीं मन सोचने लगा कि “आजतक अपने जीवन में कभी कोई गलत काम नहीं किया,अपना चारित्रिक पतन नहीं नहीं किया तो इस उम्र में कोई गलत काम कैसे करुं,अपना चारित्रिक पतन करुं। यदि मैं कालगर्ल पर एक हजार रुपये खर्च करने के बजाय अपनी पत्नी पर खर्च करुँ तो मेरी धर्म पत्नी आजीवन हम पर खुश रहेगी,हमें ढ़ेर सारा प्यार देगी “।
प्रमोद ने अपनी आत्मा से कहा कि “हमें इस दल-दल में जाने से बचा लो,मेरा चारित्रिक पतन होने से बचा लो”।
जब शाम को काल गर्ल हनी फोन करती है तो प्रमोद ने कहा “हनी बहन अब मैं आपके शहर से वापस अपने गाँव की ओर लौट रहा हूँ।अपने गाँव पहुंचते हीं प्रमोद ने एक गहरी श्वांस ली और ईश्वर को शुक्रिया अदा किया कि “आज हम चारित्रिक पतन होने से बाल-बाल बच गये”।
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अरविन्द अकेला

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