सीताराम पवार की दो ताजी रचनाये -आंखों में जादू और घूँघट

कलियां भी घुंघट उतारने लगी


“वैसे तो भंवरों के चूमने से कलियां कभी नाराज नहीं होती”
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मंजिल ने राही से कब कहा कि इस सफर पर चल

शमा ने परवाने से कब कहा कि इस आग में तू जल

लेकिन कली के कान में भंवरे ने चुपके से कुछ कहा

फिर तो कली भी शरमा कर बोली आज नहीं कल।

समंदर ने सरिता से कब कहा कि तू भी आकर मुझसे मिल

सरिता ही सारे बंधन तोड़कर मिलने में होती है सफल।

इश्क करने वाले भी दिलों के जज्बात समझ लेते हैं

जज्बात समझने वाले भी ढूंढ ही लेते हैं इश्क का हल।

गुलशन में अब हसीन बहार ने खुलकर ली अंगड़ाई है

बाग भी मुस्कुराने लगा फूलों के दिल भी गए मचल।

खिलती हुई बहार में भंवरे हिजाब ढूंढने लगे अब तो

कलिया भी घुंघट उतारने ही लगी चेहरा दिखाने लगी नवल।

वैसे तो भंवरों के चूमने से कलियां कभी नाराज नहीं होती

तितलियां भी रंग बिखेरने लगी भंवरे भी करने लगे पहल।

यहाँ पढ़ें एक से एक रचनाओं को

उसकी आंखों में तो जादू है


“यह दिल तो दीवाना है हरदम उसकी यादों में ही रहता है”

वह मेरी आंखों में अब तो ख्वाबों की तरह रहता है

वह अब तो मेरे जुड़े में गुलाबों की तरह रहता है।

और पिछले छह-सात महीनों से वह भी किराए के बगैर

वह मेरे दिल में अब तो नवाबों की तरह रहता है।

कैसे नजरें मिलाऊं उससे उसकी आंखों में तो जादू है

क्या बात करूं उससे वह मेरी जुबां पर जवाबों की तरह रहता है।

अब तो वह मेरे तसव्वुर से निकलने का भी नाम नहीं लेता

मेरे हसीन हुस्न पर अब तो वह शबाबो की तरह रहता है।

उसका ही नशा अब तो मेरे दिल पर ऐसा छाया है

उसका खुमार अब तो मेरे दिल भी पर शराबों की तरह रहता है।

उससे ही मिलने को अब तो मेरा भी मन करने लगा है

क्योंकि वह मेरे ही दिल पर फरियादों की तरह रहता है।

हरपल उसकी यादों में दिल खोया रहता है मेरा अब तो

यह दिल तो दीवाना है हरदम उसकी ही यादों में रहता है।. इस वाक्य को टच करें और श्रीसाहित्य देखें

सीताराम पवार
उ मा वि धवली
जिला बड़वानी
9630603339

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