श्री राम प्राकट्योत्सव_चंद्रप्रकाश गुप्त

शीर्षक -श्री राम प्राकट्योत्सव

(समस्त देशवासियों को श्री राम जन्म रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं)

नवदुर्गा माता की नवधा भक्ति, शक्ति साधना से अद्भुत अलौकिक प्रकटे

मन वचन कर्म के पक्के, श्री राम ने मनुजता के दर्द समेटे अटपटे

*नवमी तिथि चैत्र मास पुनीतम, भये प्रकट बाल स्वरूपम*

*भव भय भंजनम, निर्गुण, सगुण,विषम,सम रूपम*

*मार्तंड वंश उन्नयनम, महेश्वर धनु चाप खंडनम*

*अखंडम करुणा करंतम, नमामि भक्त वत्सलम*

*राजीव नयन,शशि मुख, नीलांबुज श्यामल गातम*

*रघुनंदन उद्धारो दीन जनन,शरणं पाद पंकजम*

राम हमारी मर्यादा हैं, राम सदा हमारे आदर्श रहे

श्वांस श्वांस में राम समाये, राम नाम का रुधिर बहे

सुहावन आज राम जन्म की बेला है

घर घर में विश्वास भाव का मेला है

राम रहे सदैव कर्तव्य समर्पित

कर्म पथ रहा राम का अलबेला है

बाल रूप जन जन नयन निहारे

शैशव मे ही निशाचर अति संहारे

शिव धनुष भंग कर जनक सुता से व्याहे

राजमहल ऐश्वर्य छोड़,वन गमन सिधारे

विप्र,धेनु सुर, संत हित वचन उचारे

निषाद राज शबरी का सम्मान किया,खर दूषण मारे

स्वर्ण मृग मोह हुआ सीता को

श्रीराम ने मारीच सहित अन्य असुर उद्धारे

छद्म रूप धारण किए दशानन खड़ा हुआ था द्वारे

लक्ष्मण रेखा लाॅ॑घ शक्ति ने , किया सुनिश्चित रावण वध था

जटायु, सुग्रीव,अंगद, हनुमान, विभीषण के राम वने सहारे

सभी दुष्ट दानवों का दर्प हरा,जो थे रावण को अति प्यारे

राम हमारी मर्यादा हैं, राम सदा हमारे आदर्श रहे

श्वांस श्वांस में राम समाये, राम नाम का रुधिर बहे

जय जय श्री राम

चंद्रप्रकाश गुप्त ‘चंद्र’
(ओज कवि एवं राष्ट्रवादी चिंतक)
अहमदाबाद, गुजरात
अहमदाबाद, गुजरात
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