नये साल पर कविता-श्रिया पांडेय

नए साल पर कविता 2022

नए वर्ष में नई पहल हो।
कठिन ज़िंदगी और सरल हो।।
अनसुलझी जो रही पहेली।
अब शायद उसका भी हल हो।।
जो चलता है वक्त देखकर।
आगे जाकर वही सफल हो।।
नए वर्ष का उगता सूरज।
सबके लिए सुनहरा पल हो।।
समय हमारा साथ सदा दे।
कुछ ऐसी आगे हलचल हो।।
सुख के चौक पुरें हर द्वारे।
सुखमय आँगन का हर पल हो।।
नए साल में
प्यार लिखा है
तुम भी लिखना।

प्यार प्रकृति का शिल्प
काव्यमय ढाई आखर
प्यार सृष्टि पयार्य
सभी हम उसके चाकर।

प्यार शब्द की
मयार्दा हित
बिना मोल, मीरा-सी-बिकना।

प्यार समय का कल्प
मदिर-सा लोक व्याकरण
प्यार सहज संभाव्य
दृष्टि का मौन आचरण।

प्यार अमल है ताल
कमल-सी,
उसमें दिखना

श्रिया पांडेय कक्षा 12 की छात्रा27B Samar garden इस्माईलगंज इंदिरा नगर लखनऊ उत्तर प्रदेश

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