मेरे बचपन की एक सच्ची दास्ताँ

************************ (जब मैं गुम हो गया था) ******************** पहले अक्सर गाँव-घर की महिलाएँ झुंड बनाकर ट्रैक्टर वगैरह से कहीं यज्ञ या कोई धार्मिक अनुष्ठान आदि देखने जाया करती थी, क्योंकी उस समय गांव देहात के लिए ट्रेक्टर ही उपयुक्त और सस्ती सवारी हुआ करती थी और सुगमता से मिल भी जाती थी। एक दिन की … Read more

वो औरत लेखिका डा बीना सिंह

एक संस्मरण वो औरत बात उन दिनों की है लेकिन बिल्कुल सच्ची है मेरी शादी उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी बनारस के पास एक गांव में हुआ है उस समय वहां ना बिजली के सुविधा थी ना यातायात की जब कभी दैनिक सामानों की जरूरत पड़ती है तब भी शहर की ओर जाना पड़ता था … Read more

लघुकथा बहू भी बेटी के समान होती है

बहू भी बेटी के समान होती है लघुकथा श्यामा प्रसाद का इकलौता बेटा नवीन पढ़ाई पूरी करने के बाद गाॅंव में ही पब्लिक स्कूल खोल बच्चों को पढ़ाने लगता है । फार्म हाऊस पहले से था ही, जिसे श्यामा प्रसाद सम्हालते थे, लेकिन अब चूंकि उम्र बढ़ रही थी तो वह भी बेटे के जिम्मे … Read more

लधुकथा कान भरने का असर

लधुकथा कान भरने का असर विश्वजीत प्रसाद एक सामाजिक व पारिवारिक व्यक्ति थे। वे अनुमंडल कार्यालय में एक सरकारी क्लर्क थे।वे अपनी पत्नी हीरा देवी,अपने तीन बच्चे मुकेश, सुरेश ,दिनेश व एक भतीजे प्रमोद संग हंसी-खुशी बैदराबाद में एक किराया के मकान में रहते थे। उनके सभी बच्चे व भतीजे अब वयस्क हो चुके थे। … Read more

sieve to sieve a short story

sieve to sieve A short story Ramu has been married for four years. He also has two children. The elder girl is three years old and the younger son is in her arms. Ramu loves his children more than his life. His wife does not get along with her mother-in-law. Ramu used to explain that … Read more

लघुकथा पंडुकी के अंडे

महाविद्यालय प्रांगण के वृक्ष और पौधे तथा एक कोने में स्थित छोटा-सा तालाब। महाविद्यालय में अनगिनत पशु पंक्षियों का बसेरा बन चुका है। निर्भिक होकर विचरण करते हुए तीतर, मोर, पंडुकी, गौरैया, जल बत्तख, अनेक रंगों की छोटी-छोटी चिड़िया, खरगोश, शाही, इत्यादि महाविद्यालय के शांत और सुन्दर वातावरण के प्रत्यक्ष गवाह हैं। हाँ, दो-तीन महिने … Read more