अभिलाषा

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आदमी भाग रहा बेतहाशा नित नूतन अभिलाषा, आदमी भाग रहा बेतहाशा। आसमां छूने की चाहत, बढ़ रही जीवन प्रत्याशा।। आदमी …

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आजकल

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आजकल देख अब बदल रहा है युग आजकल। विष बन रहा है माँ का दूध आजकल।। मान भी रिश्तों का …

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कहा था ना मिलेंगे

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कहा था ना मिलेंगे *आइये न मेरे प्रीत जहाँ पर पहले हम मिले थे…….* ———— अनन्त अनन्त जन्मों पूर्व ! …

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नारी तुम अबला नहीं

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नारी तुम अबला नहीं, तुम एक सबला नारी हो। तुम में पूरे वीरता के गुण समाये, इसलिए तुम झांसी की …

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कविता अपनों से जंग

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अपनों से जंग विधा कविता भले बैर भाव पल रहे जंग नहीं लड़ सकते हैं चंद चांदी के सिक्कों पे …

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