एक कविता आँधियों से डरना नहीं है तुझे- सुथार सुनील

संघर्ष….
शुरुआत तेरी हर दिन की, मुस्कान से भर दे,
कंटक भरी राह हो सही, वक्त को तू बदल दे

मिलती है, उजालो से भरी रोशन-सी जिंदगी जिसे
संघर्ष कर के तू, हर मुश्किल को आसान कर दे

आँधियों से डरना नहीं है तुझे ,कभी कहीं भी
हौसलें बुलंद हो तेरे कि, हर तूफ़ान से लड़ दे

वक्त के साथ क़दम मिला के, चलता ही रहे तू
जिंदगी की किताब को, दुनिया का खिताब कर दे

कर्म करता रहे, कामियाबी कदम चूमेगी तेरी
परिश्रम के फल में, सफलता का रस तू भर दे

संघर्ष करने वालो की, उड़ान होती है अहम
“कलम” ठोकर खाकर तुम , मंजिल पार कर दे

खिल उठेगी उजड़े चमन की कलियाँ चारो ओर
संघर्ष की सीमाओं में, जांका जल – समीर भर दे

असर्फिया बाहें फ़ैलाया करेंगी, नहीं उसका मोल
अंधेरा हट जाए, कर उजाला जग रोशन कर दे

सुथार सुनील एच. “कलम”
एम.पी.सी.सी. भाडोत्रा, कम्प्यूटर शिक्षक
गाव- रानोल , ता. दांतीवादा,बनासकांठा
SutharSunil01@gmail.com
Mo- 9979363553

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