सीने में उठे इस दर्द से राहत तुम्ही से मिलती

*तुम्हीं से मिलती है*
“जो दिल से समझता है वह इबादत तुम्हीं से मिलती है”

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चेहरे पर खुशनुमा मुस्कुराहट तुम्ही से मिलती है

सीने में उठे इस दर्द से राहत तुम्ही से मिलती है।

अब तुम भी हमारी इस जिंदगी से कभी रूठ मत जाना

हमको अब जीने की चाहत तुम्ही से मिलती है

जब जीना खत्म हुआ तब हमे जीने का सलीका आया

अब तो संभल कर जीने की हिदायत तुम्ही से मिलती है।

जब भी अपने बेताब दिल से मै गजल तुम पर लिखता हूं

गजल लिखने की मुझे हिमायत तुम्हीं से मिलती है।

यह दिल कभी बेखुदी में नासाज होने लगता है मेरा

इस नासाज दिल को हिफाजत तुम्हीं से मिलती हैं

मेरी गजलों को तुम्हारी हौसला अफजाई मिलती है

इन हसीन गजलों को मोहब्बत तुम्हीं से मिलती है।

मेरी वफाएं गजलों को जो अक्सर दिल से समझता है

जो दिल से समझता है वह इबादत तुम्हीं से मिलती है।

सीताराम पवार
उ मा वि धवली
जिला बड़वानी
9630603339

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