नववर्षाभिनंन्दन-विद्या शंकर अवस्थी पथिक

नववर्षाभिनंन्दन
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हर घर में बन्दनवार बन्धे हैं
हर छत मुंडेर पर दीप जलें हैं
हर घर में देखो कोलाहल है
हर दिशा में शोर और हलचल है
तरुवर पर चिड़ियों चहक रही हैं
क्या कोई आने वाला है
मुर्गे ने भी वांग लगा दी
कोयल ने भी गीत सुनाया
दिनकर की किरणों ने आकर
शुभ सन्देश सुनाया है
उठो चलो नवदीप जलाओ
नया वर्ष अब आया है
नव वर्ष है तेरा अभिनन्दन
है धरा कर रही है वन्दन
तुम नव खुशियाँ ले आओगे
कष्टों को दूर भगाओगे
कोरोना को दूर भगा कर के
नव जीवन ज्योति जलाओगे
सूरज की नव किरणों से
जीवन हर्षित हो जायेगा
अन्धकार को दूर भगा
जग आलोकित हो जायेगा
नव वर्ष तुम्हारा अभिनन्दन
पथिक भी गीत सुनाता है
धर्म के पथ पर कर्म करो
जीवन सुखमय हो जाता है
कवि विद्या शंकर अवस्थी पथिक कल्यानपुर कानपुर

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