उत्सव-रणजीत बोरिचा

उत्सव
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मनाना उत्सव सहर्ष है, आ रहा जो नव वर्ष है।छोड़कर जूठी एषणा,लेनी है हमको नव प्रेरणा।

भूलकर पुरानी बातें,बीती कटुताकी काली रातें।अपनाकर सर्वोदय,करना हमे सबका उत्कर्ष है।मनाना उत्सव सहर्ष है, आ रहा जो नव वर्ष है।

अपनो को अपनाते,उलझनों को चले सुलझाते।बनाकर पराए अपने,करना यही कार्य सहर्ष है।मनाना उत्सव सहर्ष है, आ रहा जो नव वर्ष है।

सेवा के सेतु चलाते, निःस्वार्थ मंजिले बिछाते।सच करने को सपने,जीवन का यह निष्कर्ष है।मनाना उत्सव सहर्ष है, आ रहा जो नव वर्ष है।

पुरुषार्थी नीव कराते,सफलता के महल बनाते।मानवता उसमे बसाने,हरदम हम सब समर्थ है।मनाना उत्सव सहर्ष है, आ रहा जो नव वर्ष है।
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खुशियों के पौधे लगाते, दिलों मैं गुल महकाते।आजीवन इसे अपनाएं,यही ये सारा परामर्श है।मनाना उत्सव सहर्ष है, आ रहा जो नव वर्ष है।

किरदार -दीपक कुमार

मनाना उत्सव सहर्ष है, आ रहा जो नव वर्ष है।छोड़कर जूठी एषणा,लेनी है हमको नव प्रेरणा।

रणजीत बोरिचा “ॐकार”
गढ़डा स्वामीनारायण

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